केंद्र सरकार ने रबी सीजन को ध्यान में रखते हुए उर्वरक सब्सिडी बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार के अनुमान के मुताबिक इस सीजन में उर्वरक सब्सिडी पर करीब ₹37,952 करोड़ का खर्च आएगा। इस फैसले का उद्देश्य किसानों को समय पर और किफायती दरों पर खाद उपलब्ध कराना है, ताकि फसल उत्पादन प्रभावित न हो और खेती की लागत को नियंत्रित किया जा सके।
सरकार का खास फोकस डीएपी (डाय-अमोनियम फॉस्फेट) पर रहेगा, क्योंकि इसकी मांग रबी फसलों में अधिक होती है। सब्सिडी बढ़ने से डीएपी की कीमतों में स्थिरता बनी रहने की उम्मीद है, जिससे किसानों को बाजार में बढ़ी हुई दरों का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। इसके साथ ही अन्य फॉस्फेटिक और पोटाशिक उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के भी प्रयास किए जा रहे हैं।
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विशेषज्ञों का मानना है कि उर्वरक सब्सिडी बढ़ाने से रबी सीजन की बुवाई को मजबूती मिलेगी और गेहूं, चना, सरसों जैसी प्रमुख फसलों के उत्पादन में मदद मिलेगी। सरकार का यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को सहारा देने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

