मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर न्यायालय 13 जनवरी को सुनवाई करेगा। इस मामले में दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि पुनरीक्षण की प्रक्रिया में नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया और इससे कई पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने की आशंका है। याचिकाकर्ताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताया है।
न्यायालय ने सभी पक्षों को अगली सुनवाई के लिए अपनी-अपनी दलीलें और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले पर नजर बनाए हुए राजनीतिक दलों और नागरिक संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची का पारदर्शी और निष्पक्ष होना बेहद जरूरी है, ताकि चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे। 13 जनवरी की सुनवाई में इस अहम मुद्दे पर अदालत की टिप्पणी और दिशा-निर्देशों पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

