शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल बन गया है। बीते चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स करीब 1600 अंकों से ज्यादा टूट चुका है, वहीं बाजार पूंजीकरण में लगभग ₹7 लाख करोड़ की भारी गिरावट आई है। इस तेज गिरावट ने खुदरा और संस्थागत निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक संकेतों की कमजोरी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख कंपनियों के कमजोर तिमाही नतीजों की आशंका ने भी निवेशकों का भरोसा डगमगाया है। घरेलू स्तर पर ब्याज दरों और महंगाई को लेकर अनिश्चितता भी बाजार की चाल को प्रभावित कर रही है।
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हालांकि, बाजार जानकारों का मानना है कि यह गिरावट पूरी तरह घबराने वाली नहीं है और इसे मुनाफावसूली तथा वैश्विक कारकों से जोड़कर देखा जाना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने और मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों पर ध्यान देने की सलाह दी जा रही है। आने वाले दिनों में वैश्विक संकेत और आर्थिक आंकड़े बाजार की दिशा तय करेंगे।

