‘आवारा कुत्ते’ से जुड़े मामले में तीसरे दिन भी अदालत में सुनवाई जारी रही। सुनवाई के दौरान आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या, उनके अवैध प्रजनन और विदेशों से हो रहे कथित आयात जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए। याचिकाकर्ता पक्ष ने दलील दी कि अवैध तरीके से हो रहे प्रजनन और आयात पर सख्त नियंत्रण नहीं होने के कारण समस्या लगातार विकराल होती जा रही है।
अदालत में यह भी कहा गया कि आवारा कुत्तों के हमलों का सीधा असर आम नागरिकों की सुरक्षा पर पड़ रहा है, खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा एक बड़ी चिंता बन गई है। कई मामलों में सुबह-शाम बाहर निकलना जोखिमभरा हो गया है, जिससे सामाजिक जीवन प्रभावित हो रहा है। इस पर प्रशासनिक जिम्मेदारी और मौजूदा नियमों के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी सवाल उठाए गए।
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सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित पक्षों से ठोस आंकड़े और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। साथ ही संकेत दिया कि आवारा कुत्तों की समस्या के समाधान के लिए संतुलित नीति, कड़े नियम और जन-सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले कदमों की आवश्यकता है। मामले की अगली सुनवाई में अहम दिशा-निर्देश जारी होने की संभावना जताई जा रही है।

