भ्रष्टाचार विरोधी कानून को लेकर अदालत ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है, जो सरकारी कर्मियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की प्रक्रिया से सीधे तौर पर जुड़ा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी सरकारी कर्मचारी पर भ्रष्टाचार के आरोप में कार्रवाई से पहले कानून में तय प्रक्रिया और सक्षम प्राधिकरण की अनुमति का पालन अनिवार्य है। इस निर्णय को प्रशासनिक और कानूनी दृष्टि से अहम माना जा रहा है।
फैसले में कहा गया है कि भ्रष्टाचार निरोधक कानून का उद्देश्य दोषियों को सजा दिलाना है, लेकिन इसके साथ ही ईमानदार अधिकारियों को बेवजह की कानूनी कार्रवाई से संरक्षण देना भी उतना ही जरूरी है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि बिना ठोस साक्ष्य और उचित मंजूरी के मुकदमा चलाने से प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हो सकता है।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से भविष्य में सरकारी कर्मियों के खिलाफ दर्ज होने वाले मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को तय मानकों का सख्ती से पालन करना होगा, ताकि भ्रष्टाचार के मामलों में न्यायसंगत और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

