आगामी बजट 2026 से पहले देश के चावल निर्यातकों को बड़ी राहत की उम्मीद है। इंडियन राइस एक्सपोर्टर्स फेडरेशन (IREF) ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से चावल निर्यात को प्रोत्साहन देने के लिए कई अहम मांगें रखी हैं। निर्यातकों का कहना है कि हाल के वर्षों में निर्यात शुल्क, वैश्विक मांग में उतार-चढ़ाव और लॉजिस्टिक लागत बढ़ने से कारोबार पर दबाव पड़ा है, ऐसे में बजट से ठोस समर्थन जरूरी है।
आईआरईएफ ने सरकार से गैर-बासमती चावल पर लगाए गए प्रतिबंधों और शुल्कों में और ढील देने, निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत करने तथा किसानों और निर्यातकों के लिए सस्ती वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। संगठन का मानना है कि यदि सरकार निर्यात नीति को स्थिर और अनुकूल बनाती है, तो भारत वैश्विक चावल बाजार में अपनी मजबूत स्थिति और बेहतर कर सकता है।
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विशेषज्ञों के अनुसार, यदि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 में चावल निर्यातकों के लिए कर राहत, लॉजिस्टिक सपोर्ट और आसान क्रेडिट जैसी घोषणाएं करती हैं, तो इससे न केवल निर्यात बढ़ेगा बल्कि किसानों की आय में भी इजाफा होगा। अब सभी की निगाहें बजट भाषण पर टिकी हैं कि सरकार इस महत्वपूर्ण कृषि क्षेत्र को कितनी राहत देती है।

