फिल्म ‘इक्कीस’ (Ikkis) सिर्फ एक युद्ध आधारित कहानी नहीं है, बल्कि यह युद्ध की कीमत, इंसानी संवेदनाओं और नैतिक सवालों को गहराई से उठाती है। फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसकी सोच है, जो दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर करती है कि जंग जीत से ज्यादा नुकसान क्यों छोड़ जाती है। कहानी भावनात्मक रूप से मजबूत है और स्क्रीनप्ले दर्शकों को शुरू से अंत तक बांधे रखता है।
फिल्म में धर्मेंद्र का अभिनय दिल छू लेने वाला है। सीमित संवादों में भी उन्होंने अपने किरदार के दर्द, अनुभव और संवेदनाओं को बखूबी उकेरा है। उनके दृश्य भावुक कर देते हैं और फिल्म को एक अलग ऊंचाई पर ले जाते हैं। वहीं अगस्त्य ने अपने अभिनय से सभी को चौंकाया है। उनकी परफॉर्मेंस में सहजता और आत्मविश्वास साफ नजर आता है, जो उन्हें भविष्य का सुपरस्टार बनने की ओर इशारा करता है।
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निर्देशन, बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी फिल्म के मूड को मजबूती देती है। ‘इक्कीस’ उन फिल्मों में से है जो मनोरंजन के साथ-साथ सोचने पर मजबूर करती है। अगर आप भावनात्मक, अर्थपूर्ण और दमदार अभिनय से सजी फिल्म देखना चाहते हैं, तो ‘इक्कीस’ जरूर देखी जा सकती है।

