भारतीय बैंकिंग सेक्टर में पिछले 20 वर्षों में बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिला है। इस दौरान बिना गारंटी वाले कर्ज (Unsecured Loans) में करीब 23 गुना की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड, उपभोक्ता ऋण और डिजिटल लेंडिंग के विस्तार ने इस वृद्धि को नई रफ्तार दी है। आसान प्रक्रिया और तेज मंजूरी के चलते आम उपभोक्ताओं के बीच ऐसे कर्ज की मांग लगातार बढ़ी है।
read also: Essential Safety Tips for Women: एक पल की लापरवाही, बड़ा नुकसान! महिलाओं के लिए जरूरी सुरक्षा टिप्स
हालांकि, सरकारी बैंकों की बात करें तो उनकी स्थिति निजी बैंकों और एनबीएफसी की तुलना में अधिक संतुलित मानी जा रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अब भी सुरक्षित और गारंटी वाले कर्ज पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, जिससे जोखिम नियंत्रित बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना गारंटी वाले कर्ज में बढ़ोतरी से खपत तो बढ़ी है, लेकिन बैंकों को एनपीए के खतरे को देखते हुए सतर्क रणनीति अपनाने की जरूरत है।

