मकर संक्रांति 2026 का पर्व 14 जनवरी को मनाया जा रहा है। यह त्योहार सूर्य के मकर राशि में प्रवेश करने के साथ जुड़ा हुआ है और इसे पूरे भारत में भव्य रूप से मनाया जाता है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, मकर संक्रांति उस समय को दर्शाता है जब सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर मार्ग बदलता है, यानी शीतकालीन विषुव बिंदु से उत्तरी गोलार्ध में प्रवेश करता है। इसे ‘उत्तरायण’ भी कहा जाता है और इसे खगोलीय बदलाव के रूप में देखा जाता है।
मकर संक्रांति का पर्व केवल धार्मिक महत्त्व तक सीमित नहीं है। यह मौसम परिवर्तन और फसल कटाई के मौसम से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन सूर्य की किरणें अधिक सीधी होकर पृथ्वी पर पड़ती हैं, जिससे दिन बढ़ने लगते हैं और ठंड कम होने लगती है। इसे वैज्ञानिक दृष्टि से ऊर्जा और जीवन शक्ति का प्रतीक माना जाता है।
इसके अलावा मकर संक्रांति के दौरान काजू, तिल, गुड़ और विभिन्न मीठे व्यंजनों का सेवन स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है। पतंगबाजी और सामुदायिक मेलों के माध्यम से लोग सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का अनुभव करते हैं। इस पर्व के पीछे विज्ञान और परंपरा का अनोखा मेल देखने को मिलता है, जो इसे और भी खास बनाता है।

