दिल्ली की यमुना नदी पर बने सिग्नेचर ब्रिज की देखरेख अब लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधीन होगी। पहले यह जिम्मेदारी दिल्ली पर्यटन विभाग के पास थी। PWD के वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को इस बदलाव की जानकारी दी और बताया कि अब ब्रिज के रखरखाव, सुरक्षा और संचालन की पूरी जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी के पास होगी।
देखभाल की जिम्मेदारी क्यों बदली?
यह ऊंचा पुल 2018 में आम जनता के लिए खोल दिया गया था। इसे दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्टेशन डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (DTTDC) ने 1518 करोड़ रुपये की लागत से बनवाया था। शुरुआती तीन साल तक DTTDC ने इसका रखरखाव किया, लेकिन बजट की कमी के कारण पिछले साल कई बार पीडब्ल्यूडी से इसे संभालने की गुजारिश की गई। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, यह तकनीकी रूप से एडवांस संरचना है, जिसे विशेष रखरखाव की जरूरत होती है। अब पीडब्ल्यूडी इसे बेहतर तरीके से संभालेगा, ताकि संरचना की सुरक्षा और आम जनता के अनुभव में सुधार हो सके।
सुरक्षा व्यवस्था होगी मजबूत
ब्रिज पर हाल के वर्षों में चोरी और सुरक्षा संबंधी कई घटनाएं हुई हैं। नट-बोल्ट गायब हो जाते हैं, लोग स्टंट करते हैं और रील्स बनाते हैं, साथ ही साफ-सफाई की समस्या और लिफ्टों का अक्सर खराब रहना भी आम समस्या रही है। इन सभी समस्याओं को रोकने के लिए पीडब्ल्यूडी नई सुरक्षा व्यवस्था लागू करेगा। इसके तहत तीन शिफ्टों में 24 घंटे गार्ड तैनात होंगे। एक सशस्त्र गनमैन भी सुरक्षा में तैनात रहेगा। इस पूरे इंतजाम पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये खर्च होंगे। पीडब्ल्यूडी ने टेंडर आमंत्रित कर दिए हैं और योजना है कि यह काम जनवरी के पहले हफ्ते तक पूरा हो जाएगा, जिससे पुल की सुरक्षा और सुविधाओं में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।
ब्रिज की अनोखी खासियतें
यह भारत का पहला असिमेट्रिकल केबल-स्टेड ब्रिज है, जिसमें 127 स्टील केबल्स लगे हैं। यह पुल आउटर रिंग रोड को करावल नगर और भजनपुरा से जोड़ता है, जिससे लोनी, गाजियाबाद, राजिंदर नगर, नॉर्थ ईस्ट दिल्ली और राजधानी के केंद्रीय हिस्सों तक सीधी और आसान पहुंच सुनिश्चित होती है। ब्रिज का पाइलॉन दिल्ली की सबसे ऊंची संरचना है, जो कुतुब मीनार से दोगुना ऊंचा है। इसमें 154 मीटर ऊंचा व्यूइंग बॉक्स भी है, लेकिन फिलहाल इसे और लिफ्टों को आम जनता के लिए नहीं खोला गया है।

